संवेग संरक्षण का नियम – Samveg Sanrakshan Ka Niyam और अनुप्रयोग – Law of Conservation of Momentum in Hindi

Law of Conservation of Momentum

नमस्कार दोस्तों, आज के आर्टिकल में हम संवेग सरंक्षण के नियम(Law of Conservation of Momentum) के बारे में जानकारी प्राप्त करने वालें है जिसमें हम जानेंगें कि संवेग क्या है(Samveg Kya Hai), संवेग किसे कहते हैं(Samveg Kise Kahate Hain), संवेग संरक्षण का नियम(Samveg Sanrakshan Ka Niyam) क्या है और इसके अनुप्रयोग क्या है। तो दोस्तों चलिए बढ़तें है आज के आर्टिकल की ओर…

संवेग संरक्षण के सिद्धान्त को समझने से पहले हमें यह पता होना चाहिए कि संवेग क्या है इसलिए हम सर्वप्रथम संवेग(Momentum) को समझतें है।

संवेग क्या है – Samveg Kya Hai

Samveg Kya Hai
Samveg Kya Hai

दोस्तों संवेग को समझने के लिए हम निम्न चार प्रकार की स्थितियों को देखेंगें और निष्कर्षों को देखेगें।

संवेग की स्थितियाँ

  • प्रथम स्थिति: किसी मजबूत दीवार के साथ एक साइकिल टकराती है जिसका वेग 10 किलोमीटर प्रति घंटा तथा द्रव्यमान 50 किलो है।
  • द्वितिय स्थिति: किसी मजबूत दीवार के साथ एक ट्रक टकराता है जिसका वेग 10 किलोमीटर प्रति घंटा तथा द्रव्यमान 10 क्विंटल है।
  • तृतीय स्थिति: कक्षा में सो रहे एक विद्यार्थी के सर पर अध्यापक के द्वारा एक चैक मारा जाता है जिसका वेग 60 किलोमीटर प्रति घंटा तथा द्रव्यमान 20 ग्राम है।
  • चतुर्थ स्थिति: पुलिसचोकी से धोखे से भागते हुए आतंकवादी पर पुलिसकर्मी के द्वारा उसके सर पर गोली दागी जाती है जिसका वेग 200 किलोमीटर प्रति घंटा तथा द्रव्यमान 20 ग्राम है।

संवेग की स्थितियों के निष्कर्ष

  • प्रथम स्थिति का निष्कर्ष: दीवार से साइकिल के टकराने पर दीवार नहीं टूटेगी और साइकिल चालक को भारी नुकसान होगा।
  • द्वितिय स्थिति का निष्कर्ष: दीवार से ट्रक टकराने पर दीवार टूट जाएगी। किन्तु ट्रक को भी नुकसान होगा।

उपरोक्त दोनों निष्कर्ष से ज्ञात होता है कि यहाँ पर दीवार के टूटने का मुख्य कारक द्रव्यमान है। चुँकि यहाँ वेग तो समान है परन्तु द्रव्यमान में अन्तर है।

  • तृतीय स्थिति का निष्कर्ष: विद्यार्थी के सर पर चैक मारने पर वह नींद से जाग जाएगा।
  • चतुर्थ स्थिति का निष्कर्ष: आतंकवादी के सर पर गोली मारने से वह मर जाएगा।

उपरोक्त दोनों निष्कर्ष यह दर्शातें है कि यहाँ पर वेग मुख्य कारक है। यहाँ द्रव्यमान तो समान है तथा वेग में अन्तर है।

तो दोस्तों इसी पर संवेग(Momentum) कार्य करता है। तो चलिए अब हम अच्छे से समझ पाएगें कि संवेग किसे कहते हैं ?

संवेग किसे कहते हैं – Samveg Kise Kahate Hain

Samveg Kise Kahate Hain
Samveg Kise Kahate Hain

संवेग की परिभाषा : “किसी गतिशील वस्तु के द्रव्यमान तथा वेग का गुणन ही संवेग कहलाता है।” संवेग एक सदिश राशी है। संवेग और वेग की दिशा समान होती है। माना किसी वस्तु का वेग(v) और द्रव्यमान(m) है तो उस वस्तु का संवेग(p=mv) होगा। किसी वस्तु का संवेग गतिशील वस्तु के द्रव्यमान और वेग के समानुपाती होता है। इसका गणितिय व्यापन निम्न प्रकार होगा।

संवेग समानुपाती गतिशील वस्तु का द्रव्यमान

P∝m

संवेग समानुपाती गतिशील वस्तु का वेग

P∝v

अतः

P∝mv

P=kmv

यहाँ k का मान 1 है।

इसलिए

p=mv

संवेग का सूत्र p=mv है।

संवेग का मात्रक – Samveg Ka Matrak

  • C.G.S पद्धति में ‘ग्राम-सेमी/सेकण्ड’ या ‘डाइन-सेकण्ड’ 
  • M.K.S पद्धति में ‘किग्रा-मीटर/सेकण्ड’ या ‘डाइन-सेकण्ड’
  • S.I. पद्धति में ‘किग्रा-मीटर/सेकण्ड’

संवेग संरक्षण का नियम – Samveg Sanrakshan Ka Niyam

Samveg Sanrakshan Ka Niyam
Samveg Sanrakshan Ka Niyam

Law of Conservation of Momentum : “यदि किसी निकाय पर कोई बाह्य बल कार्य नहीं कर रहा हो तो निकाय का कुल संवेग शुन्य रहता है इसे ही संवेग संरक्षण का नियम कहतें है।’’ या ‘‘यदि किसी वस्तु पर सभी बाह्य बलों का मान शून्य हो तो उस वस्तु पर परिणामी बल का मान भी शून्य होगा और इस स्थिति में वस्तु के संवेग का मान स्थिर रहेगा, इसी को संवेग संरक्षण का नियम कहतें है।” संवेग को उत्पन्न या नष्ट नहीं किया जा सकता है इसे एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित ही किया जा सकता है।

m1u1 + m2u2 = m1v1 + m2v2

Total momentum before collision = Total momentum after collision

  • m1 = mass of particle A
  • m2 = mass of particle B
  • u1 = velocity of particle A before collision
  • u2 = velocity of particle B before collision
  • v1 = velocity of particle A after collision
  • v2 = velocity of particle B after collision

नोट: किसी विलगित निकाय/वियुक्त निकाय में संवेग का मान शून्य होता है।

अगर आपको नहीं पता है कि विलगित निकाय/वियुक्त निकाय क्या है तो चलिए इसे भी समझतें है।

विलगित निकाय/वियुक्त निकाय

‘‘वह निकाय जिस पर कार्य कर रहे सभी बाह्य बलों का सदिश योग शून्य हो या निकाय पर किसी भी प्रकार का कोई बाह्य बल कार्य न कर रहा हो तो उसी विलगित निकाय या वियुक्त निकाय कहतें है।’’

तो दोस्तों आज के आर्टिकल में हमने संवेग संरक्षण के नियम(Samveg Sanrakshan Ka Niyam) को अच्छे से समझा। मुझे आशा कि आपको आज का यह आर्टिकल पसंद आया होगा। अगर आपको यह आर्टिकल पंसद आया तो आप इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करें तथा इसी तरह की बेहतरीन जानकारी के लिए हमारे साथ बनें रहें।

धन्यवाद!

Articles Related Physics


दर्पण का सूत्र क्या है – Darpan Ka Sutra

टोराॅइड क्या है : टोराॅइड की परिभाषा और चुम्बकीय क्षेत्र

फोनोन्स क्या है : अर्थ, परिभाषा, गुण

चोक कुंडली क्या है – परिभाषा, सिद्धान्त, कार्यविधि, सिद्धान्त

विद्युत धारा किसे कहते है : परिभाषा, सूत्र, S.I. मात्रक, विमा, दिशा और गुण

ऊर्जा किसे कहते है : ऊर्जा की परिभाषा, प्रकार, मात्रक, इकाई, विमा और उदाहरण

भौतिक विज्ञान : भौतिक विज्ञान क्या है, परिभाषा, शाखाएँ और महत्त्व

गतिज ऊर्जा : गतिज ऊर्जा क्या है, परिभाषा, सूत्र, विमिय सूत्र, गुण और उदाहरण

कार्य ऊर्जा और शक्ति

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top